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शपथ लेने के बाद राज्यसभा में नेताओं के दिखे तेवर

  

भारत में एक बार फिर से चुनाव के खत्म होने के बाद सत्र शुरू हुई तमाम नेता अपनी अपनी जीत के बाद शपथ लेने राज्यसभा पहुंचे राज्यसभा पहुंचने के बाद तमाम नेताओं के बाद एक और चुनाव होना था जिसका नाम या जो पद का नाम स्पीकर था यानी राज्यसभा अध्यक्ष था विपक्ष अपनी तरफ से राज्यसभा अध्यक्ष का नाम दे रहा था साथ ही साथ  में सत्ता पक्ष भी अपनी अपना अध्यक्ष ओम बिरला के तौर पर आगे किया ओम बिरला का नाम सुनते ही कांग्रेस की तरफ से कोई भी टिप्पणी नहीं की गई कांग्रेस के नेता जय राम रमेश बताते हैं कि हमने राज्यसभा अध्यक्ष के लिए विरोध नहीं किया कि इसका नाम आए उसका नाम आए उन्होंने कहा कि आप सत्र का पहला दिन था इसलिए हम किसी भी चीज का विरोध करने से बच रहे थे क्योंकि यह बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं है कि किसी भी चीज का पहले ही दिन विरोध करना शुरू कर दें हमारी सरकार इसे पूरी तरह से वाकिफ नहीं थी कि हम ओम बिरला की या किसी भी अध्यक्ष पद का नाम आगे आते ही उसका विरोध करना शुरू कर दें जनता भी एक बार ओम बिरला के अध्यक्षता में राज्यसभा को संचालित होते हुए देख चुकी है इसलिए जनता को भी संतुष्टि है कि हां राज्यसभा बिल्कुल ठीक-ठाक हाथों में गई  लेकिन ओम बिरला को राज्यसभा अध्यक्ष चयनित होने के बाद  कई सियासी पार्टी के लीडरों ने ओम बिरला से अपनी छोटी पार्टी या माइनॉरिटी को सपोर्ट करने वाली पार्टी को भी नजर में रखने के लिए कहा सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि वह माइनॉरिटी समाज को सपोर्ट करती हैं उन्होंने अध्यक्ष महोदय से यह रिक्वेस्ट किया कि आप छोटी पार्टियों को भी नजर में रखें और उन पार्टियों को या उन सांसदों को भी नजर में रखे जो  छोटे समाज से ताल्लुक रखते हो साथ ही साथ अखिलेश यादव ने भी इस बात को उठाया कि आप सत्ता पक्ष  के साथ-साथ विपक्ष की भी बातें सुन या विपक्ष के भी मुद्दों का ख्याल करें अखिलेश यादव ने अध्यक्ष के साथ-साथ कई अन्य मुद्दों पर भी सवाल उठाए उन्होंने कहा कि मैं जिस सदन से आता हूं  उस सदन के अध्यक्ष की कुर्सी थोड़ा ऊंची है तो आपके लिए मैं किसे कहूं कि आपकी कुर्सी थोड़ी ऊंची होनी चाहिए

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